मैं किस्मत वाला था | हिंदी रोमांटिक कविता। रिदीप डेका | twilight of poem
मैं किस्मत वाला था
-रिदीप डेका
मैं किस्मत वाला था
जो तुम मुझे मिली थीं ,
पागल तो था मैं तुम्हारे लिए
पर तुम भी कुछ कम नहीं थी.
याद हैं ,
जब भी तुम मुझसे मिलती थी
हर बार तुम एक चॉकलेट दिया करती थी ,
घर जाते वक़्त मैं बोलू ना बोलू
तुम मुझे "लव यू " ज़रूर बोलती थीं.
याद है वो सारी बातें मुझे
जो तुम मुझे हर रोज कहा करती थी ,
हर बात पे तो मैं ही गलती करता था
फिर क्यों तुम रोते हुए मुझे सॉरी बोलती थी.
तुझे रुलाया तो मैने बहत
गैरों में कहा इतना दम था,
मानता हूं गलती मेरी थी
पर यह आशिक तेरा सच्चा था .
याद हैं मुझे वो हर रोज की लड़ाइयां
गलती मेरी ही थी पर तुम्हें रुलाता था,
सायद तुम्हारा प्यार में समझ ना सका
क्या करू तब मगरूरी प्यार से ज्यादा था .
तुम्हें खोने के बाद ही मैने समझा
में प्यार करने के लायक नहीं था ....
तुझे बेवफा में क्यों कहु ?
मेरे साथ तो ऐसा होना ही था .
यार मैं तो क़िस्मत वाला था
जो तुम मुझे मिली थी ,
तेरे प्यार को मैं कभी समझ ना सका
शायद यही मेरी गलती थी .
तुझे याद करके में आज भी रोता हूं
जैसे तुम मेरी वजह से रोया करती थी,
जब तक तेरे प्यार को समझने लगा था में
शायद तब तक मेरी किस्मत पलट चुकी थी.
तेरे जाने के बाद मैने ये जान लिया
सबके नसीब हर बार अच्छे नहीं होते
और ये भी जान लिया मैने की ....
छोड़ के जाने वाले हर बार बेवफा नहीं होते.
यार सच में मैं किस्मत वाला था
जो तुम मुझे मिली थी .....
औरों में वो बात कहा होती हैं
जो बात सिर्फ तुझमे थी.
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