हाँ, माँ ऐसी ही होती है
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हाँ, माँ ऐसी ही होती है :: twilightofpoem.inहाँ, माँ ऐसी ही होती है!-शितल ढाेणे |
खुद ही डाँटती है और खुद ही
रोती है
क्या माँ ऐसी ही होती है !!
जब मैं ज्यादा बात करती हू,
तो मुझे वो चुप रहने के लिये
कहती है !!
और जब मैं चुपचाप बैठती हू
तो मैं बात क्यूँ नहीं कर रही हू
इस बात पर डाँटती है,
क्या माँ ऐसी ही होती है !!
अपना तो हर दर्द, वो बड़ी
आसानी से हम सबसे छुपा
लेती है !!
और जब, मैं उससे कुछ छुपाऊ
तो वो मुझसे नाराज हो जाती है
क्या माँ ऐसी ही होती है !!
यूँ तो सबसे वो मेरी शिकायतें
करती रहती है
पर जब कोई और मेरी कमियां
निकाले तो,
वो उन्हें मेरी खूबियाँ बताने
लगती है
क्या माँ ऐसी ही होती है !!
हाँ हाँ, माँ ऐसी ही होती है
वो उसके डाँट में भी प्यार
छुपाती है !!
बिना बोले ही हर दर्द को
जान लेती है
चाहें दुनिया आपके खिलाफ
हो जाये,
पर उसकी दुआ हमेशा
आपके साथ होती है
हाँ, माँ ऐसी ही होती है !!
सबसे जुदा, पर सबकी
एक जैसी ही होती हैं
हाँ, माँ ऐसी ही होती है !!


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